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आयुर्वेद द्धारा पानी पीने का सही नियम एवं भ्रन्तियों से निवारण

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    हर व्यक्ति स्वस्थ रहना चाहता है परन्तु छोटी छोटी मह्त्वपूर्ण बातें नहीं पता होने के कारण वह रोगग्रस्त होकर कष्ट झेलता है अगर हम स्वास्थय के प्रति जागरूक हो और स्वय एवं प्रियजनों को स्वस्थ रहने मदद कर सकती है, और समाज में पानी पीने के नियम के प्रति फैली भ्रांति को दूर कर के समाज कल्याण में योगदान दे सकते है !

    भ्रांतियां एवं आयुर्वेद के नियम

    भ्रान्ति 1. आमतौर पर जनसामान्य में भ्रान्ति होती है कि पानी सुबह उठकर पीना चाहिए, गरम – ठंडा या खाने के पहले बाद में आदि आदि आज हम आपको पानी पीने के सामान्य नियम बता रहे है जो आपको स्वस्थ रहने के लिए अनिवार्य है !

             आयुर्वेद का विज्ञान हमे बतलाता है कि सुबह उठकर बिना कुल्हा किये ही जल ग्रहण करना चाहिए अब ये जो नियम है वह उस व्यक्ति के लिए जो ब्रह्म महूर्त में उठा हो और जिसका खाना पच गया हो , और जन सामान्य में अधिकांश लोग 7 बजे से 10 बजे तक उठकर एक साथ 1 गिलास से 2 लीटर तक पानी एक साथ पी जाते है जो कि गलत है और बहुत साड़ी बिमारियों की जड़ साबित होता है !

             कभी कभी ऐसा होता है कि जिनको सालों से इतना जल ग्रहण करने की आदत हो जाने की वजह से उनका शरीर इस तरह से ढल जाता है कि उन लोगो को नुक्सान नहीं होता है, तब भी ऐसे लोग जो बीमारी का इंतज़ार कर रहे है उनको धीरे धीरे अपनी इस गलती का सुधार करना चाहिए !

    जल ग्रहण की आयुर्वेद विधि

    * ब्रह्म महूर्त में उठकर ताड़ी आप जल ग्रहण करते है तब वह आपको घूंठ-घूंठ कर लार को मिला कर पीना चाहिए क्योंकि लार जो कि हमारे शरीर में रोज 3 लीटर बनती है वो हमारे लिएबहुत लाभदायक है !

    * ब्रह्म महूर्त में शीट;ल जल के अलावा दूध , मधु, घृत या दोनों को मिला कर या सब मिला कर लेना रसायन यानि उम्र को थमने का कार्य करता है !

    * इनसे भी जिनका वजन बढ़ा हो शहद, जिनकी गर्मी बढ़ी है वो दूध और घृत या सामान्य व्यक्ति सब मिलकर ले सकता है !

    भ्रान्ति 2 . फ्रीज़ का ठंडा या चिल्ड पानी ठंडक देगा –

    आयुर्वेद दृष्टिकोण – आयुर्वेद में बताया गया है कि इतना ठंडा पानी जिनमे दांत जड़ जाए वो नहीं पीना चाहिए , सामान्य बुद्धि से विचार करने पर हम जान सकते है हमारा शरीर गर्म है या ठंडा पानी पीने के बाद पेट में जाकर उसको गर्म ही होना है जबकि ठंडा पानी पीने पर शरीर को अतिरिक्त म्हणत करनी पड़ेगी उसको सामान्य करने के लिए जिससे और गमी बढ जायेगी !

    सही विधि – गर्मी के दिनों में मटके जितना ठंडा पानी चाहे वो फ्रीज का हो पीना लाभदायक है !

    भ्रान्ति 3 – वाटर  प्यूरीफायर का पानी पीना लाभदायक है !

    सही विधि –  वाटर  प्यूरीफायरका उपयोग करते समय हम पानी का टीडीएम (पानी में घुलनशील पोषक तत्व ) की जांच अवशय कर ले अथवा कम या ज्यादा होने पर गंभीर रूप से बिमार पड़ सकते है और अगर हम प्यूरीफायर का जल ग्रहण करते है तब हमारे शरीर में इसकी आदत हो जायेगी और सामान्य पानी पीने पर हम उसको पचा नहीं पाएंगे हमारे गले की बिमारी आसानी से हो जाती है , यथार्थ हमारी रोग प्रतिरोधक शमता कम हो जायेगी !

    भ्रान्ति 4 – हमे कितना पानी पीना चाहिए कोई कहता है सामान्यता अधिक पानी पीना 2 से 4 लीटर पीना चाहिए ये भ्रान्ति है !

    आयुर्वेद दृष्टिकोण – हम सबका शरीर और प्रकति अलग है इसलिए ये नियम स्थाई नहीं हो सकता , सामान्य नियम है जब प्यास लगे घूंठ – घूंठ कर प्यास बुझने तक पानी पीना चाहिए !

    भ्रान्ति 5 – क्या हमे गर्म होने पर ठंडा पानी मिलाना और ठंडा होने पर सामान्य पानी मिलकर पानी पीना चाहिए ?

    आयुर्वेद दृष्टि – दो तरह के जल को कभी मिलाना नहीं छाइये ऐसा जल को उपयोग करने पर व्रिक्ति पैदा होती है ! क्योंकि दोनों जल की मुख्य सरचना अलग हो जाती है ! आयुर्वेद 1 कदम और आगे जाकर बताता है कि हम दो अलग जगह का भी पानी पीते है तब वो पिए जब पहले ग्रहण किये जल का पाचन हो जाए !

    भ्रान्ति 6 – भोजन के साथ जल लेना या नहीं लेना इस बारे में भी बहुत भ्रांतियां रहती है !

    सही विधि – सुबह के भोजन के समय फलों का रस , दोपहर के समय में खाने के साथ प्यास लगने पर ताज़ा छाछ या मठा और रात्रि में प्यास लगने पर भोजन के बीच में पानी लेना चाहिये पर आधा या एक घूंठ जरूरत पड़ने पर अधिक मात्रा में बिलकुल नहीं ! भोजन आधे घंटे पहले या आधे घंटे बाद प्यास लगने पर इच्छानुसार जल पिया जा सकता है ! फलों का रस या छाछ न होने पर साधारण जल का उपयोग क्र सकते है !

    भ्रान्ति 7 – अधिकाँश लोग प्रश्न पूछते एवं बताते है कि हम रोज गुनगुना पानी सुबह पीते है कुआ ये सही है ?

    आयुर्वे दृष्टिकोण – सभी लोगो को गुनगुना पानी पीने की आवश्यकता नहीं होती यही कई बार जिनकी प्रकृति गर्म वाली यानिउ पित प्रकृति जो कि अग्नि महा भूत का प्रतिनिधि वाले लोग है उनको बहुत नुक्सान करती है संक्षेप में एसिडिटी जिनको है उनको बहुत नुक्सान होता है !

    आयुर्वेदा विधि – सामान्य नियम यह है कि सुबह सामान्य कमरे के तापमान वाला पानी पीना चाहिए !

    अन्य मह्त्वपूर्ण तथ्य

    ऐसी परिस्थिति जिनमे अल्प (कम) जल ही ग्रहण करना है !

    * भूख कम लगने पर

    * रक्त की कमी होने पर

    * पाचन ठीक न हो !

    * दस्त या अतिसार होने पर

    * शरीर में सूजन हो

    * मधुमेह

    * प्रतिश्याय (झुकाम)

    शीतल जल किसको ग्रहण करना चाहिए

    * चककर आने पर

    * बेहोशी में

    * उलटी होने पर

    * गर्मी लगने पर

    * शरीर में जलन और रक्त विकार में

    गुनगुना जल किसको ग्रहण करना चाहिए

    * भूख बढ़ाने के लिए

    * पाचन के लिए

    * गले की बीमारी में

    * मूत्र कम आने पर

    * झुकाम खांसी में

    * नए ज्वर में

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