
एसिडिटी आज के समय सबसे बड़ी कॉमन बीमारी है लगभग छोटे से बड़े लोग इसके शिकार है सीने में जलन मुंह में खट्टा पानी आना ,उल्टी आना,सिर में दर्द रहना एक कॉमन लक्षण मिलते हैं आज के दौर में लोगों की एक धारणा है कि एक एंटासिड टेबलेट खाने से एसिड न्यूट्रल हो जाती है कुछ छड़ के लिए लोगों को आराम मिलता है सोचते हैं हम ठीक हो गए परंतु ऐसा नहीं है की बीमारी जड़ से ठीक हुई है कुछ समय के लिए दब जाती है
क्यों होती ऐसी समस्या
आइए आयुर्वेद की दृष्टिकोण से स्टमक और गाल ब्लैडर में पित्त दोष के कारण स्लगिश फंक्शन दोनों एसिडिटी के मुख्य रूप से कारक है जब हम भोजन करते हैं जठराग्नि के माध्यम से परिपाक होकर दो भाग में बट जाता है एक सार भाग (नरिशमेंट पार्ट) व एक किट भाग (वेस्ट पार्ट) बनता है यदि जठराग्नि कि मंदता (स्लगिश) है तो सार भाग एसिडिक हो जाता है ऐ एसिडिटी जब सेल्स में सरकुलेट होती है तो कई प्रकार के रोगों का जन्म देती है
सबसे पहले रस धातु (प्लाजमा सेल्स ):
में जाकर फीवर, जोड़ों में दर्द करता है और ये आतर्व धातु में जाकर मेनसेज ब्लीडिंग को बढ़ा देता सफेद पानी आना ,खारिश होना और यूटीआई इनफेक्शन करता है
ब्लड सेल्स (रक्त धातु) :
जब यह पित्त ब्लड सेल्स में पहुंचता है तो स्किन डिजीज जैसे आटीकेरिया स्किन पर दापड़ पड़ना, खारिश होना, पिंपल्स सोरायसिस एंटीफंगल, रक्तपित्त अर्थात नाक ,मुंह व आधो भाग से ब्लड निकलना, ब्लड एसिडिटी होना, हार्ट अटैक, ब्लड कैंसर, कैंसर आदि में एसिडिटी की पास्ट हिस्ट्री मिलती है
मसल्स सेल्स (मांस धातु) :
जब यह एसिडिटी मसल्स सेल्स में जाती है तो फोड़े फुंसी , बवासीर, मांसपेशियों में सूजन होना
मेद धातु :
जब यह एसिडिटी (अम्लता )मेद सेल्स में जाती है तो किडनी में सूजन होना, पसीने से बदबू आना
अस्थि धातु (बोन सेल्स)
जब यह अम्लता बोन सेल्स में पहुंचती है तो जोड़ों का दर्द होना , कमर का दर्द होना हड्डियों का कमजोर होना इवेंन कैल्शियम टेबलेट लेने के बावजूद भी हड्डियों की कमजोरी जोड़ों का दर्द नहीं जाता क्योंकि कैल्शियम का मेटाबॉलिज्म अम्लता के कारण एसिडिटी के कारण प्रॉपर नहीं होता है हड्डियों में सूजन होना, बालों का झड़ना,बार-बार नाखून और दांत का फंगल इन्फेक्शन होना
मज्जा धातु (नर्वस सिस्टम सेल्स)
जब यह एसिडिटी नर्वस सिस्टम में पहुंचती है तो आंख पर चश्मा लगाना,आंखों में सूजन होना आंख में लाली, खारिश होना ,शिजोफ्रेनिया (बड़बड़ बोलना) पागलपन का होना, मस्तिष्क ज्वर,नसों में सूजन ( न्यू राइटिस)होना
शुक्र धातु (रिप्रोडक्टिव सेल्स)
जब एसिडिटी रीप्रोडक्टिव सेल्स में पहुंचती है प्रोस्टेट में सूजन होना प्रीमेच्योर एजुकुलेशन (शीघ्रपतन) , स्पर्म काउंट कम होना,इनफर्टिलिटी होना
क्या क्या कारण है
•गरम भोज्य पदार्थ के सेवन से जैसे एक्सेस टी ,कॉफी, अल्कोहल।
•ज्यादा मानसिक तनाव।
•समय पर खाना न खाना।
•ज्यादा खट्टे व नमक पदार्थ का सेवन करने से।
•ज्यादा हैवी डाइट लेने से
•संयोग विरुद्ध आहार का सेवन करना
•इनडाइजेशन रहने पर भी खाना खाना प्रकुपित पित्त अग्नि को मंद कर देता है जिसे खाया पिया आहार ठीक से नहीं पचता है और अम़लीहो जाता है जिससे पित्त की अम्लता बढ़ जाती है
क्या क्या लक्षण है
जब अमाशय ( स्टमक )की अम्लता बढ़ जाती है तो निम्न लक्षण नजर आते हैं जैसे
•सिर दर्द होना ,
•चक्कर आना
•उल्टी होना
•खाना खाने के बाद पेट में दर्द होना
•चेस्ट में दर्द होना
•गले में जलन,इंफेक्शन रहना
•भूख कम लगना
•नींद अधिक आना
•शरीर में शिथिलता रहना ,काम में मन न लगना
•पेप्टिक अल्सर , ड्योडनल अल्सर
जब यही एसिडिटी (अम्लता ) छोटी आतं (स्मॉल इंटेस्टाइन)से बड़ी आंत (लार्ज इंटेस्टाइन)में पहुंच जाती है तो लूज मोशन (डायरिया) होना
डिसेंट्री पेचिश ,स्किन संबंधित एलर्जी रेशेस खारीश दापड़ होना,बवासीर (ब्लीडिंग पाइल्स),पेट में दर्द होना
क्या कहता है आयुर्वेद
आयुर्वेद हमेशा जड़ (रूट कॉज )का इलाज करता है इस रोग में स्टमक गाल ब्लैडर पित्त की विकृति से कमजोर पड़ जाते हैं जिसे इन का फंक्शन स्लगिश हो जाता है इनको ताकत देने वाली औषधि के साथ-साथ पित्त को पित्त वीरेचक औषधि के माध्यम से बाहर निकल जाने से उपरोक्त रोगों में रोगी स्वस्थ महसूस करता है और पुनः नहीं होता
घरेलू उपचार
1-आंवला जूस ले।
2-आंवला चूर्ण व मिस्श्री।
3-धनिया, जीरा, सौंफ का चूर्ण।
समाधान
आयुर्वेदिक चिकित्सा के परामर्श के अनुसार नब्ज जांच करा कर अपनी प्रकृति के अनुकूल आहार का सेवन करें । भार्गव आयुर्वेद संस्थान क्रॉनिक हाइपर एसिडिटी का सफल इलाज जीएमपी सर्टिफाइड कंपनी के प्रोडक्ट के आधार पर करता है क्रॉनिक हाइपर एसिडिटी ट्रीटमेंट के लिए दवा जाने और पाएं।
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