
पीलिया पित्त विकृति से संबंधित विकार है रोग है जो व्यक्ति अत्यधिक उष्ण और तीक्ष्ण आहार का सेवन करता है इस बीमारी से प्रायः चपेट में आता है
गर्मी और बरसात के दिनों में पित्त से संबंधित विकार देखने को मिलते हैं जैसे त्वचा संबंधित रोग खारिश होना, दापड पडना , पेट से संबंधित विकार एसिडिटी, अपचन की स्थिति, लिवर फंक्शन कमजोर होना उनमें से पीलिया प्रमुख रोग है पीलिया के वजह से शरीर में खून की कमी होने लगती है शरीर पीला पड़ने लगता है पाचन शक्ति बहुत कमजोर हो जाती है आपके आंख पीली पड़ने लगती है और पेशाब में पीलापन लक्षण नजर आने लगते हैं इन लक्षणों को नजर अंदाज कर दिया जाए तो खतरे से कम नहीं होता अगर आप उपरोक्त लक्षणों से पीड़ित हैं इसका इलाज करा कर जल्द ही स्वास्थ्य लाभ मिल जाता है
क्यों होती है ऐसी समस्या
आयुर्वेद के दृष्टिकोण से यह पित्त दोष से होने वाला रोग है पित्त का मेन स्थान स्मॉल इंटेस्टाइन है अगर डिजीज के पैथोजेनेसिस को देखा जाए तो पित्त का सबसे पहले स्मॉल इंटेस्टाइन में संचय होता है संचय होने के पश्चात प्रकोप अर्थात प्रवोकेशन , प्रशर अर्थात आर्गन और सेल्स में सरकुलेट होकर अनेक प्रकार के रोगों जन्म देता है जैसे यही पित्त अगर लंबे समय तक स्टमक और गाल ब्लैडर में है तो एसिडिटी का बनना ,उल्टी आना, नोजिया होना और यही पित्त लीवर आर्गन में जाकर लिवर फंक्शन को कमजोर कर देना ,लीवर का इन्फेक्शन करना, पीलिया होना, हेपेटाइटिस जैसे गंभीर बीमारियों में होने की इसका बहुत ज्यादा भूमिका होती है ।
यदि पित्त का सेल्स पर इसका प्रभाव देखा जाए तो यदि प्लाजमा सेल्स और ब्लड सेल्स में जाकर स्कीन से संबंधित रोग देखने को मिलते हैं जैसे एग्जिमा सोरायसिस ,खारिश, दापड पडना
उपरोक्त अगर पित्त दोष की पैथोजेनेसिस प्रोसेस को रोक दिया जाए इलाज कर दिया जाए तो पीलिया और पित्त से होने वाले 40 प्रकार के रोग से छुटकारा मिल जाता है।
पित्त संबंधित रोग करने वाले दो आर्गन मेन रूप से बढ़ावा देते हैं लीवर और गालब्लेडर जब इनके फंक्शन या इनके कार्य की क्षमता कमजोर हो जाती है तब यह विकार लक्षण के रूप में दिखाई देते देने लगते हैं
जब शरीर में रेड ब्लड सेल्स एक निश्चित समय में या 120 दिन में टूट जाते हैं तो बिलुरुबिन नामक एक बाई प्रोडक्ट बनता है ये पदार्थ पहले लीवर में जाता है और फिर धीरे धीरे मल मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है लेकिन अगर किसी कारण से अभी से 120 दिन से पहले टूट जाते हैं तो लीवर मे बिलीरुबिन मात्रा बढ़ जाती है।
क्या क्या कारण है
आचार्य चरक के अनुसार
कमला बहुपित्तैश कोष्ठक शाखाश्रया मता
1.कोष्ठ लिवर फंक्शनिंग डिजाडर/ हैपेटॉसेल्यूलर ज्वाइंडिस
शाखा आब्सट्रैक्टिव जौंडिस ज्वाइंडिस
हिमोलिटिक ज्वाइंडिस
हैपेटॉसेल्यूलर ज्वाइंडिस
हैपेटॉसेल्यूलर पीलिया तब होती है जब लीवर की कोशिकाएं इतनी गंभीर रूप से डैमेज हो जाती हैं बिलुरुबिन को डिग्लुकोरोनाइड को गाल ब्लैडर में ले जाने की इनकी क्षमता बहुत कम हो जाती है जिससे ब्लड में बिलुरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है।
आब्सट्रैक्टिव जौंडिस
आब्सट्रैक्टिव जौंडिस को काला पीलिया भी कहा जाता है
जो भी बाइल लीवर में बनता है वह गालब्लेडर में स्टोर होता है इस प्रोसेस में वाइलस्टोन आ गया या पेनक्रिएटिक सिस्ट हो गई ,कार्सिनोमा , या पित्त की थैली में सूजन होना , आदि के कारण पित्त का लीवर से गाल ब्लैडर में नहीं जा पाना ।
हिमोलिटिक ज्वाइंडिस
बिलीरुबिन के रक्त से लीवर में जाने से बाधा हो तो सिकल सेल एनीमिया ,हिमॉलिटिक एनीमिया के कारण होता है।
क्या क्या लक्षण है
•त्वचा नाखून आंख का पीलापन होना
•ब्लड की मात्रा कम होना
•मूत्र और मल का कलर पीला होना
•रोगी के शरीर में खारिश होना
•कमजोरी के लक्षण नजर आना
•शरीर में जलन और बार-बार पानी पीने की अनुभूति
होना
क्या कहता है आयुर्वेद
आयुर्वेद हमेशा सभी बीमारियों का रूट काज का इलाज करता है नब्ज की जांच करा कर अपनी प्रकृति के ही हिसाब से आहार-विहार के सेवन पीलिया में इस समस्या से निजात मिल जाता है।
समाधान
आयुर्वेदिक चिकित्सा के परामर्श के अनुसार नब्ज जांच करा कर अपनी प्रकृति के अनुकूल आहार का सेवन करें । भार्गव आयुर्वेद संस्थान बेस्टका सफल इलाज जीएमपी सर्टिफाइड कंपनी के प्रोडक्ट के आधार पर करता है पीलिया ट्रीटमेंट के लिए दवा जाने और पाएं।
चिकित्सा के अभिलाषी लोग भी नब्ज़ दिखाकर निदान कराके सही एवं सटीक इलाज प्राप्त करें।
जो लोग दूर-दराज में रहते हैं आने में असमर्थ है वह लोग भी संस्थान में संपर्क करके मैसेज डाल कर या वैदिक निदान लिंक के माध्यम द्वारा अपनी समस्या को अपने कंफर्ट पर दर्ज करा कर परामर्श प्राप्त करा सकते हैं।
उपयोगी प्रोडक्ट्स
यकृत शोधन टेबलेट
काया शोधन टेबलेट
लीवो डिटॉक्स कैप्सूल
एस टी एम क्वाथ
पीलिया में लाभकारी दवाईयां चारों को एक साथ प्रयोग बहुत कारगर है।
परहेज सावधानियां
वर्कआउट एवं व्यायाम जरूरी है
फैटी फ्राई खान-पान परहेज़
ओवर ईटिंग से बचें
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43 thoughts on “best ayurvedic treatment of jaundice”
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