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Best Ayurvedic Treatment Of Ulcerative Colitis

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    Ulcerative colitis

    व्यस्त जीवन शैली में लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां हो रही हैं गलत आहार-विहार की वजह से सबसे ज्यादा पेट से संबंधित रोग हो रहे हैं जैसे एसिडिटी, तेजाब, इनडाइजेशन ,गैस बनना ,आई बी एस, अल्सरेटिव कोलाइटिस आदि इन्हीं समस्याओं में सबसे ज्यादा युवा पीढ़ी में आंत्र से संबंधित रोग देखने को मिल रहे हैं जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस अर्थात आंतों में सूजन और जख्म अल्सर के लक्षण मिलते हैं
    अल्सरेटिव कोलाइटिस एक ऐसी आम समस्या है जिसकी वजह से रोगी बहुत ज्यादा परेशान हो जाता है और उसका जीवन कष्ट दाई हो जाता है लेकिन रोगी इसे मरता नहीं है
    अगर सही समय पर बीमारी के लक्षणों को समझ लिया जाए तो इससे काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है
    इस बीमारी में स्टमक, कोलन और रेक्टम पार्ट प्रभावित होते है यह बीमारी डाइजेस्टिव सिस्टम पर बुरा असर डालती है और सही समय पर इलाज न कराया जाए तो खतरे का कारण भी बन सकती है

    क्यों होती है ऐसी समस्या।

    आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार
    इस बीमारी का मुख्य कारण जठराग्नि का कमजोर होना या डाइजेस्टिव फायर का वीक होना मेन कारण है आयुर्वेद शास्त्र में अग्नि मंदता के कारण अर्श (बवासीर )अतिसार (डायरिया)ग्रहणी विकार होते हैं।
    अर्थात अग्नि लेवल को सही कर लिया जाए तो इस बीमारी से छुटकारा मिल जाता है और परमानेंट के लिए मुक्ति मिल जाती बशर्ते अपने अग्नि लेवल को पहचानने की आवश्यकता होती है।
    आयुर्वेद मतानुसार जठरअग्नि को 4 तरह का बताया गया है
    1.मंदअग्नि इसमें कफ के विकृति के कारण होती है इसमें रोगी को भूख ना के बराबर होती है रोगी एक बार खा लेने पर दोबारा खाने की इच्छा नहीं रखता है
    2.तीक्ष्ण अग्नि इसमें रोगी को भूख बहुत अच्छी लगती है परंतु इसका डाइजेशन लेबल बहुत कमजोर होता है अर्थात खाना को अच्छे ढंग से नहीं पचा पाता हैं
    3.विषम अग्नि इसमें रोगी को कभी भूख लगती है कभी नहीं लगती वात प्रकोप का मेन कारण होता है
    4.सम अग्नि इसमें सभी दोष अवस्था मे होते हैंअर्थात वात पित्त कफ सम अवस्था में होते हैं और अग्नि लेवल अच्छा होता है
    अर्थात उपरोक्त में अग्नि के बारे में जो बताया गया है यदि स्टमक को कौन सा दोष कमजोर कर रहा है इसके इलाज कर दिया जाए तो इस रोग में काफी हद तक निजात मिल जाता है

    क्या क्या कारण हैं
    •अजीर्ण इनडाइजेशन अवस्था में खाना खाना
    •आम टॉक्सिन बनने के कारण
    •डाइजेस्टिव फायर का विक होना
    •बैक्टीरिया पैरासाइट्स और वायरस के कारण होने वाले इन्फेक्शन जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस
    •स्ट्रेस तनाव

    क्या क्या लक्षण है
    •बार-बार मल त्याग के साथ सेटिस्फेक्शन ना होना
    •दिन में इसका प्रकोप ज्यादा रहता है रात्रि की अपेक्षा
    •कभी मत पतला मल त्याग करना
    •कभी पक्व मल त्याग करना
    •पेट में मरोड़ के साथ मल त्याग आव का आना
    •अग्नि बल बहुत कमजोर रहना
    •आमरस टॉक्सिन बनना
    •अल्सरेटिव कोलाइटिस में बार-बार त्याग तो करता है परंतु मल के साथ ब्लड ज्यादा आता है
    •स्ट्रेस और एंजाइटी में पल्स रेट कोलाइटिस में इसकी सिम्टम्स बढ़ जाते हैं
    •पित्त की विकृति से आंत में सूजन और अल्सर जख्म हो जाता है

    क्या कहता है आयुर्वेद
    आयुर्वेद हमेशा सभी बीमारियों का रूट काज का इलाज करता है नब्ज की जांच करा कर अपनी प्रकृति के ही हिसाब से आहार-विहार के सेवन अल्सरेटिव कोलाइटिस में इस समस्या से निजात मिल जाता है

    समाधान
    आयुर्वेदिक चिकित्सा के परामर्श के अनुसार नब्ज जांच करा कर अपनी प्रकृति के अनुकूल आहार का सेवन करें । भार्गव आयुर्वेद संस्थान बेस्टका सफल इलाज जीएमपी सर्टिफाइड कंपनी के प्रोडक्ट के आधार पर करता है अल्सरेटिव कोलाइटिस ट्रीटमेंट के लिए दवा जाने और पाएं।
    चिकित्सा के अभिलाषी लोग भी नब्ज़ दिखाकर निदान कराके सही एवं सटीक इलाज प्राप्त करें।
    जो लोग दूर-दराज में रहते हैं आने में असमर्थ है वह लोग भी संस्थान में संपर्क करके मैसेज डाल कर या वैदिक निदान लिंक के माध्यम द्वारा अपनी समस्या को अपने कंफर्ट पर दर्ज करा कर परामर्श प्राप्त करा सकते हैं।

    उपयोगी प्रोडक्ट्स
    भूनिंबादि सिरप
    ऐसीडो टैबलेट
    करंजादी वटी
    मुलेठी चूर्ण
    अल्सरेटिव कोलाइटिस में लाभकारी दवाईयां चारों को एक साथ प्रयोग बहुत कारगर है।
    लेने की विधि

    परहेज सावधानियां
    वर्कआउट एवं व्यायाम जरूरी है
    फैटी फ्राई खान-पान परहेज़
    ओवर ईटिंग से बचें

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    1 thought on “Best Ayurvedic Treatment Of Ulcerative Colitis”

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